“कजरारी आँखे”

“कजरारी आँखे”

पलकों में आकाश लिए मैं, सागर तट को कबतक देखुं फिर वहीं कजरारी आँखें…बोलो कबतक उन्हें निरखूँ । हर शाम तु ही अंतिम सरगम,हर सुबह की तु पहली लोरी, दिनरात तेरी इन यादों में, बहते कुछ आँसू चोरी-चोरी कभी शाम जो निपट अकेले,इन अधरो को छुना चाहुं, वहीं सांझ की चंचल...
“एक ख्वाब समर्पित करता हूँ, तुम सच की मुहर लगा देना।”

“एक ख्वाब समर्पित करता हूँ, तुम सच की मुहर लगा देना।”

है प्रेम बड़ा उलझा सौदाउम्रें लेता एक पल देकर,बस यादों का अवलंबन हैअब तड़प रहे तुमसे दुर होकर, उन वादों का कोई शोक नहींहां,पर दुआ का तेरे आभारी हूँ,तु मुड़ी तो राह मुड़ गई परमैं पथिक प्रेमी अभिसारी हूँ। है चोट लगी दिल पर इतनी किसच भी अब झुठी लगती हैहै स्वप्न टूटे दिल...