है प्रेम बड़ा उलझा सौदा
उम्रें लेता एक पल देकर,
बस यादों का अवलंबन है
अब तड़प रहे तुमसे दुर होकर,
उन वादों का कोई शोक नहीं
हां,पर दुआ का तेरे आभारी हूँ,
तु मुड़ी तो राह मुड़ गई पर
मैं पथिक प्रेमी अभिसारी हूँ।
है चोट लगी दिल पर इतनी कि
सच भी अब झुठी लगती है
है स्वप्न टूटे दिल के इतने कि
अब नींद भी रुठी लगती है।
बेचैन उमंगे कुसुमित हैं
बस इनको हीं बहला देना,
एक ख्वाब समर्पित करता हूँ
तुम सच की मुहर लगा देना।
उत्कट तेरे ‘पलकों की हंसी’
थी मरहम विकट व्यथाओं की
शर्म तेरे गालों की सगी प्रिय
निश्छल सौगात हवाओं की,
अनिमेष तेरे नयनों की क्रीड़ा….
मैं आज भी व्याकुल रहता हूँ,
है याद हरेक अरदास तेरी
घुट-घुटकर आहे ;( भरता हूँ।
नजरे ना मिलाएं चोर हैं ये
इन रश्मियों से मै ड़रता हूँ,
है दर्द मिला तुमसे इतना कि
अब खुद ‘प्रेम’ से नफरत करता हूँ।
एक प्रणय निवेदन करता हूँ
तुम इसको गले लगा लेना,
मैं प्रतिमान तुम्हारा गढ़ता हूँ
बस ‘प्यार का हृदय’ लगा देना।
मैं साधक हुं सुंदरता का,
है जुबां मेरी खामोश सही
आहत है विश्वास मगर
सच है ‘समय का दोष नहीं’।
सपनों में तुम ना आया करो
नींद में भी उठकर मैं चलता हूँ,
पल दो पल का और मैं जुगनूं हूँ,
वर्षो से तेरी आस में जलता हूँ।
हो सख्त,अटल फिर भी
एक बात यहीं दुहरा देना,
मैं कद्र ‘तुम्हारी’ करता हूँ
तुम ‘प्यार का कद्र’ सिखा देना।
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”प्राञ्जल दत्त राय”
07/11/14
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Bhut hi khubsurat rachna….aage v likhte raho
धन्यवाद महाशया 💐🤗
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