बिहार_विधानसभा_ किसे_वोट_करें
भाग -1
बिहार में 28 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच 3 चरणों में विधानसभा चुनाव होने है जिसका परिणाम 10 नवंबर को आएगा। इसके बाद तमाम अटकलों पर विराम भी लग जाएगा। लेकिन इसके पहले चुनाव से संबंधित कुछ प्रमुख बिंदुओं और राजनीतिक दलों के घोषणाओं पर चर्चा करना चाहिए।
बिहार के इस विधानसभा चुनाव में एक दर्जन से अधिक छोटी बड़ी पार्टियां अपना भाग्य आजमा रही है। लेकिन चर्चा में बीजेपी, जदयू, राजद, लोजपा और पप्पू यादव और रालोसपा का गठबंधन ही है, अमेरिका से पढ़ाई कर लौटी मिथिला की बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी की plurals पार्टी भी चर्चा के केंद्र में है।
नीतीश कुमार/जदयू
बीजेपी और आरजेडी के साथ पिछले 15 वर्षों से बिहार की बागडोर नीतीश कुमार के हाथ में ही है। इसलिए शुरुआत नीतीश कुमार से ही करना चाहिए।
इस चुनाव में नीतीश कुमार अपने काम के दम पर बिहार के जनता से वोट मांगने जा रहे है। जिसमे उनकी महत्वकांक्षी सात निश्चय योजना भी शामिल है।
सात निश्चय बिहार योजना के अंतर्गत #सड़को_का_निर्माण,
#बिजली की व्यवस्था
#शौचालय निर्माण
#कॉलजो का निर्माण,
#महिलाओ_को_आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
इसमें महिलाओं को सरकारी नौकरी देने हेतु 35% आरक्षण देने का फैसला किया।
मुख्यमंत्री ने विद्यालयों में छात्र छात्राओं के नामांकन अनुपात, सरकार के तरफ से लड़कियों को दी जाने वाली पोशाक, साइकिल और सैनिटरी नैपकिन आदि उपलब्ध सुविधाओं की चर्चा की। चुनावी सभाओं में संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री अपराध और भ्रष्टाचार रोकथाम हेतु सरकार के क़दमों की भी चर्चाएं प्रमुखता से कर रहे है। नीतीश के इन दावों में दम भी है इसलिए उनका मनोबल और आत्मबल भी औरों के मुकाबले काफी अधिक है। अपने पिछले 15 वर्षों के काम जिनमें सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा, शिक्षा सुधार आदि शामिल है, नीतीश लगातार इन्हीं मुद्दों पर लोगो को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास कर रहे हैं।
नाकामी/आरोप
मुख्यमंत्री अपनी सभाओं और साक्षात्कारों में युवाओं को संदेश दे रहे हैं कि घर के वृद्ध और अनुभवी लोगों से पुराने सरकारों के कार्यकाल और उनके कारनामों के बारे में जरूर जाने, पुराने सरकारों में नीतीश मुख्य रूप से लालू यादव के 15 वर्षों के शासन की चर्चा करते हैं। लेकिन इस दौरान नीतीश शराबबंदी की विफलता, कॉलेजों की मनमानी, शिक्षा व्यस्था में भ्रष्टाचार, नगरपालिकाओं – नगनिगम का गैरजिम्मेदाराना रवैया, डीटीओ में व्याप्त घूसखोरी, प्रखंड और पंचायत स्तर के भ्रष्टाचार पर विपक्ष के सवालों पर चुप्पी साधे हैं।
नीतीश कुमार के नल जल योजना पर भी लगातार सवाल उठ रहे है क्योंकि आवंटित बजट, और 2017 में बने स्टीमेट के अनुसार जमीनी स्तर पर कार्य कि स्थिति सवालों कर घेरे में है। (इसपर अलग से एक रिपोर्ट जल्द ही उपलब्ध की जाएगी)। सड़क और बिजली के मुद्दे पर नीतीश कुमार औरों पर भारी है। इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार की मदद से बिहार में सबसे अधिक काम हुए है। शौचालय निर्माण का श्रेय तो बीजेपी नित केंद्र सरकार को लोग दे रहे है।
युवाओं में मुख्यमंत्री को लेकर खासा नाराजगी है। जिसका उनके पास ठोष कारण भी है। https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1433655076781587&id=100004113243691
जरूरत कि चीजों की महंगाई भी एक बड़ा मुद्दा है https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1392527520894343&id=100004113243691
प्याज़ की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि भी एक बड़ा मुद्दा है। https://www.facebook.com/913311405683381/posts/1261520457529139/
बाढ़ की समस्या एक बरसात के मौसम के साथ आता ही है, जिसका बिहार के पास अब तक कोई ठोस इलाज नहीं है।https://www.facebook.com/913311405683381/posts/1220625201618665/
इसके अलावा किसानों की अपनी समस्याएं है जिनको दूर करने के लिए सरकार को एक मजबूत और विश्वसनीय वादा कर लोगो को संतुष्ट कर अपने वोट में तब्दील करना होगा।
जाति फैक्टर
बिहार में “जाति” उपरोक्त सभी मुद्दों पर भारी पड़ता है। क्योंकि वोट का अंतिम निर्णय लोग जाति के आधार पर ही करते है। इस आधार पर यदि देखे तो जदयू को नीची जातियों के वोट मिल सकते है। इसमें भी आरजेडी और कुछ निर्दलीय उम्मीदवार को मुस्लिम और यादव वोट अधिक मात्रा मिल सकता है। बीजेपी को लोग बड़ी जातियों की पार्टी मानते है इसलिए हरिजन, कुर्मी, यादव, और मुसलमान, के वोट बीजेपी के साथ होने से कम मिल सकते हैं।
इन सबके बावजूद नीतीश कुमार बिहार में मुख्यमंत्री के लिए एकमात्र मजबूत नेता है और इन्हीं को एक पैमाना मान कर लोग औरों का आकलन कर रहे है। इसलिए अनुमान लगाया जा सकता है कि 40+ उम्र वाले लोगो को युवाओं कि तुलना में नीतीश अपनी तरफ ज्यादा आकर्षित कर पाएंगे।
आदित्य मिश्रा