“जिद्द”

“जिद्द”

एक ललक तुमसे मिलने का, सपना बनकर बीत गया,दिल धडका मन रोया फिर भी ,’जिद्द’ आखिर ही जीत गया”। कुछ दोष तुम्हारी यादों का, कुछ खोट हृदय में मेरे थी,कुछ पलकें अल्हड़ भारी सी,कुछ व्याकुल नयनोँ की देरी थी,तबसे कुछ आंसू आंखों में, बस कैदी बनकर रहते थेहरबार...
“एक ख्वाब समर्पित करता हूँ, तुम सच की मुहर लगा देना।”

“एक ख्वाब समर्पित करता हूँ, तुम सच की मुहर लगा देना।”

है प्रेम बड़ा उलझा सौदाउम्रें लेता एक पल देकर,बस यादों का अवलंबन हैअब तड़प रहे तुमसे दुर होकर, उन वादों का कोई शोक नहींहां,पर दुआ का तेरे आभारी हूँ,तु मुड़ी तो राह मुड़ गई परमैं पथिक प्रेमी अभिसारी हूँ। है चोट लगी दिल पर इतनी किसच भी अब झुठी लगती हैहै स्वप्न टूटे दिल...