चुनावी अभियान की मनोहर पोथी
चुनाव अभियान क्या हैं?
चुनाव अभियान वे साधन हैं जिनके द्वारा, उम्मीदवार और राजनीतिक दल, चुनाव के पहले की अवधि में मतदाताओं को अपने मुद्दों से अवगत कराने और उनको प्रभावित कर किसी भी प्रकार उनका वोट अपने हिस्से में लेने के लिए ,अपने विचारों की रणनीति तैयार करते हैं। चुनाव अभियान में उम्मीदवार, मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पारंपरिक व नए मीडिया, सार्वजनिक कार्यक्रमों, लिखित सामग्रियों तथा अन्य साधनों का प्रयोग करते हैं। कुछ देशों में, इन उद्देश्यों के लिए प्रतियोगियों को सार्वजनिक मीडिया और स्थान भी आवंटित किया जाता है ।
आधिकारिक चुनाव अभियान की अवधि व तारीखें, आमतौर कानूनी रूप से परिभाषित होती हैं- जो एक माह से लेकर छह माह तक की हो सकती है।
उम्मीदवारी की सतही स्थिति को समझना
उम्मीदवार का आधार –
यह कुल योग्य वोटर्स में से आपकी ओर आकर्षित और अमूमन निश्चित रुझान और झुकाव रखने वाले वोटर्स के सांख्यिकी से सम्बन्धित है। राष्ट्रीय पार्टियां, आमतौर पर इन्ही पैमानों और जनता के बीच आपकी स्वीकार्यता, उनकी जीवनशैली में आपके प्रभाव की अहमियत इत्यादि के आधार पर आपकी उम्मीदवारी के वजन का आंकलन करती है.
प्रतिद्वंद्वी का आधार –
यह आपके प्रतियोगी का कुल योग्य वोटर्स के बीच स्वीकार्यता, उनके जीवनशैली को प्रभावित करने के कारक और कुल योग्य वोटर्स में उसकी और झुकाव, लगाव, व रुझान रखने वाले लोगो की सांख्यिकी से समबन्धित है।
अघोषित मतदाता –
यह मतदाता, बाजार की वह भीड़ है, जो अभी तक अपने पसंद ,नापसंद और उत्पाद आदि पर निर्णय नहीं ले पा रही हैं। यह एक संवेदनशील खंड है, जो मनोवैज्ञानिक आधार पर सूचना के लिए ग्रहणशील है। इसे किसी भी उम्मीदवार पर भरोसा करने के लिए एक कारण की आवश्यकता होती है।
उदाहरण के लिए युवा आबादी, जिसे आकर्षित करने के लिए नौकरी सम्बंधित मुद्दे, उच्चशिक्षा और जिंदगी के लम्बे अवधि में स्वप्निल भविष्य के सुनहरे लालच दिए जा सकते हैं।
मतदाताओं का यह समूह किसी भी उम्मीदवार के आगामी जीत में निर्णायक भूमिका अदा करता है।
क्यूंकि, उम्मीदवार का जो अपना आधार है वह हमेशा ही उसका अपना है . किसी भी परिस्थिति में वह सारा वोट उसे ही मिलेगा।
जो प्रतिद्वंदी का आधार है, किसी भी परिस्थिति में वह वोट आपको नहीं मिल सकता, क्यूंकि वह सारे के सारे लोग आपके प्रतिद्वंदी के लिए तन-मन-धन से समर्पित हैं।
बचा केवल ‘अघोषित मतदाता समूह’–इन्हें सिर्फ एक ‘मजबूत कारण’ पकड़ाईये, फिर सारी की सारी भीड़ आपको ही नेता मानने पर विवश हो जाएगी।
प्रश्न: अपने वोटर्स को कैसे पहचाने ?
उत्तर- “ऐतिहासिक विश्लेषण”
ऐतिहासिक विश्लेषण, पिछले चुनाव परिणाम और सर्वेक्षण के आधार पर यह निर्धारित करता है कि ऊपर वर्णित समूहों में से कौन आपकी तरफ गिरेगा। किसी नेता या पार्टी के लिए मतदाता खंड को समझना बहुत हीं जरूरी है। इसके लिए बाकायदा सर्वेक्षण, फील्ड अनुसंधान और ग्रामीण जनसंवाद हीं, सूचना के कुछ महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
अभियान के उद्देश्यों और परिभाषित मतदाता खंडों के आधार पर, डेटा का विश्लेषण करना अति आवश्यक है तथा ‘परीक्षण और अभियान’ इन सारे सर्वेक्षणों की कुंजी हैं। इसे मतदाताओं का परीक्षण करने और जनता की नब्ज पाने के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह मतदाता खंड को निर्धारित करने और मतदाताओं के लिए उपयुक्त संदेश,स्लोगन,और प्रभावी मनगढंत कहानियों को पूर्ण रूप से स्थापित और स्वीकार्य बनाने में मदद कर सकता है।
लक्ष्यीकरण
एकबात स्पष्ट रूप से समझ लें, कि- ’चुनाव जीतने के लिए सभी का वोट प्राप्त करना ना ही आवश्यक है और ना संभव’।
हालांकि, किसी अभियान के लिए ‘लक्ष्य खंड’ को परिभाषित करना और उसे केंद्रित रखना महत्वपूर्ण है। चुनाव और राजनीती में अपनी लड़ाई चुनना महत्वपूर्ण है। एक बार रणनीति की पहचान हो जाने के बाद, अभियानों को संसाधनों के हिसाब से समुचित रूप से महत्वपूर्ण चीजों और संभावित लक्ष्य (वोट) के बारे में निर्देशित कर देना चाहिए, ताकि समय या धन की बर्बादी न हो।
इसी तरह, अभियानों को एक निर्धारित उद्देश्य और लक्ष्यों के साथ ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सारे अभियान अपने मूल लक्ष्य से इतर, फालतू के क्रियकलापों में कभी विचलित न हो
बाजार अनुसंधान भी मतदान को प्रभावित करने में मदद करता है – अल्पसंख्यक दलों का प्रभाव,जातीय समीकरण, आरक्षण की स्थिति और चर्चा, राष्ट्रवाद, सेकुलरिज्म, स्थानीय मुद्दे, नौकरी-रोजगार, शिक्षा, स्त्रिओं की सामाजिक व्यवस्था और उनका सम्मान, स्वास्थ्य, जनसँख्या, लिंग, शौक, व्यापार के संभावित मौके, बिजली,पानी,खाना, घर, भौतिक पर्यावरण और संभावनाएं इत्यादि तमाम चीजें हैं जो कि ,
सर्वेक्षण के मुख्य आधार बन सकते हैं .
स्विंग वोटों का अनुमान लगाने के लिए भी यही नियम लागू होते हैं। प्रत्येक अभियान के लिए, पहला कदम अभियान के लक्ष्यों को परिभाषित करना होगा जो कि इस अभियान के दौरान महत्वपूर्ण सफलता मानदंड और प्रदर्शन संकेतांक के निर्धारण पर हीं संभव है.
प्रभाव डालने वाला लोकल व्यक्तित्व
नरेंद्रमोदी को सलमान खान, और रजनीकांत जैसे अभिनेताओं का काफी समर्थन मिला. ये लोग वह व्यक्ति थे जो 2013-14 में राजनीति से काफी दूर थे। यह तूफान के माध्यम से मीडिया को मोदी के पक्ष में ले गया और मुक्त तथा सकारात्मक पीआर के परिणाम का वाहक रहा।
सच तो यह है कि, Influencers डिजिटल मार्केटिंग का एक महत्वपूर्ण तत्व बन गया है। सही भीड़ को अच्छे तरीके से प्रभावित करने वाला, ताकि वांछित व्यक्ति इस भीड़ में स्वीकार्य हो जाये।
जरूरी नहीं कि influencer हमेशा एक सेलिब्रिटी ही हो, पर उसमें नेता के लिए विश्वसनीयता और विश्वास पैदा करने की क्षमता हो, तथा वह नेता के साथ अच्छी तरह से अनुगमन करते हुए क्षेत्रीय भीड़ को प्रभावित कर, अपने पक्ष में रूपांतरण की संभावनाओं को उच्च बनाता हो।
अधिकांश पार्टियों यहां तक की छोटे-छोटे नेताओं की भी आज एक अलग डिजिटल मार्केटिंग टीम है, जो मार्केटिंग और सेल्स टीम के साथ सामंजस्य स्थापित करने की तुलना में समाधान और इंजीनियरिंग में अधिक भरोसा करती है। इस प्रकार, मतदाताओं की इस भीड़ को सही समय पर लुभा ले रही है।
एक संबंधित संदेश
एक अभियान सभी उम्मीदवार की आम जनता के बीच अपनी पहचान और स्वीकार्यता बनाने के बारे में है। यह उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और पिछले काम, उसकी काबिलियत , उसकी विजनरी सोच इत्यादि को सामने लाता है जो उन्हें इस वर्तमान चुनाव के लिए आदर्श उम्मीदवार के रूप में स्थापित करता है।
यह दिखाता है कि उम्मीदवार को विभिन्न विचारधारा वाले समर्थकों में आकर्षित करने के लिए कौन से मुद्दे और नीतियां मायने रखती हैं। यहां आपको मतदाता के दृष्टिकोण को ध्यान में रखना होगा। आपको उनका ध्यान आकर्षित करना होगा और उन्हें वोट देकर दिखाना होगा कि आपकी जीत से उनका जीवन बेहतर होगा।
Author
Pranjal Dutt Rai
I’M Pranjal Dutt Rai.
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